उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड

श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

अध्याय XI

विविध

56. शक्तियों का प्रत्यायोजन - एक बोर्ड, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को या सचिव या किसी अन्य अधिकारी या बोर्ड के कर्मचारी को, ऐसी शर्तों और सीमाओं के अधीन, यदि कोई हो, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकेगा, इस अधिनियम के तहत अपनी उन शक्तियों और कर्तव्यों को प्रत्यायोजित करेगा जैसा कि वह आवश्यक समझे।


57. रिटर्न- प्रत्येक बोर्ड, समय-समय पर, केन्द्र सरकार को और राज्य सरकार इस तरह के रिटर्न प्रस्तुत करेगा जैसा उनके लिए आवश्यक हो।


58. संनिर्माण श्रमिकों पर 1923 के अधिनियम 8 का लागू होना - श्रमिक प्रतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के प्रावधान के उस हद तक लागू होगें जहां तक भवन संनिर्माण श्रमिकों का नियोजन उस अधिनियम की दूसरी अनुसूची में शामिल किया गया था।


59. सद्भाव से की गई कार्रवाई का संरक्षण - (1) इस अधिनियम के अनुसरण या उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम या आदेश के अनुपालन के उद्देश्य से या सद्भाव से किये गये किसी भी कार्य या किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।
(2) इस अधिनियम के अनुसरण या उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम या आदेश के अनुपालन के उद्देश्य से या सद्भाव से किये गये किसी भी कार्य के कारण होने वाली किसी भी क्षति या क्षति की समभावना के विरूद्ध, सरकार, इस अधिनियम के तहत गठित किसी भी बोर्ड या समिति या इस तरह के बोर्ड के किसी भी सदस्य या अधिकारी या सरकार अथवा बोर्ड के किसी भी कर्मचारी या सरकार अथवा किसी बोर्ड अथवा समिति द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति पर अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।


60. केन्द्र सरकार की निर्देश देने की शक्ति- इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान का राज्य में निष्पादन करने के लिए केन्द्र सरकार किसी भी राज्य की सरकार को या बोर्ड को निर्देश दे सकेगी।


61. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति- (1) यदि इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो केन्द्र सरकार, आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे प्रावधान कर सकती है जो इस अधिनियम के प्रावधानों से असंगत नहीं होगें जैसा वह उस कठिनाई को दूर करने के लिए उचित या आवश्यक या समझे।
बशर्ते, इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के बाद ऐसा कोई आदेश नहीं किया जा सकेगा।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसे करने के बाद जितनी जल्दी संभव हो सके, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।


62. नियम बनाने की शक्ति - (1) समुचित सरकार, विशेषज्ञ समिति के साथ परामर्श के बाद, अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों के निष्पादन के लिए नियम बना सकेगी।
(2) विशेष रूप से और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस तरह के नियम निम्नलिखित मामलों में, सभी या किसी के लिए प्रावधान कर सकेगेंः -


  • केंद्रीय सलाहकार समिति और राज्य सलाहकार समितियों में विभिन्न हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, उनके पद की अवधि व सेवा की अन्य शर्तें, उनके कार्यों के निर्वहन की प्रक्रिया का पालन और धारा 3 की उप-धारा (3) या, जैसी भी स्थिति हो, धारा 4 की उप-धारा (3) के तहत रिक्तियों को भरने का तरीका;
  • धारा 5 की उपधारा (2) के तहत अपनी बैठकों में भाग लेने के लिए विशेषज्ञ समिति के सदस्यों को भुगतान किये जा सकने वाले शुल्क और भत्ते;
  • धारा 7 की उपधारा (2) के तहत एक प्रतिष्ठान के पंजीकरण के लिए आवेदन का प्रारूप, उसके लिए आरोपित शुल्क और उसमें दिया जाने वाला विवरण;
  • पंजीकरण प्रमाण पत्र का प्रारूप, समय जिसके भीतर और वे शर्तें जिसके अधीन इस तरह का प्रमाण पत्र धारा 7 की उपधारा (3) के तहत जारी किया जा सकता है;
  • धारा 7 की उपधारा (4) के तहत प्रारूप जिसमें स्वामित्व या प्रबंधन या अन्य ब्यौरे में परिवर्तन पंजीकरण अधिकारी को सूचित किया जाएगा,
  • धारा 12 की उप-धारा (2) के तहत एक लाभार्थी के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन किये जाने का प्रपत्र;
  • धारा 12 की उप-धारा (3) के तहत आवेदन साथ दस्तावेज और शुल्क;
  • धारा 12 की उप-धारा (6) के तहत बोर्ड के सचिव बनाए जाने वाले रजिस्टर;
  • धारा 14 की उप-धारा (2) के तहत दिए जा सकने वाले लाभ;
  • धारा 15 के तहत वह प्रारूप जिसमें लाभार्थियों का पंजीकरण अनुरक्षित किया जायेगाः
  • धारा 18 की उप-धारा (4) के तहत अध्यक्ष और बोर्ड के अन्य सदस्यों की नियुक्ति, वेतन व देय अन्य भत्ते, और आकस्मिक रिक्तियों को भरने के तरीके, नियम व शर्तों;
  • धारा 19 की उप - धारा (3) के तहत सचिव और बोर्ड के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सेवा के नियम व शर्तें तथा वेतन व देय भत्ते;
  • धारा 20 उप-धारा (1) के तहत बोर्ड की बैठक का समय व स्थान तथा ऐसी बैठक में कारोबार के संचालन के लिए आवश्यक कोरम सहित पालन की जाने वाली प्रक्रिया व नियम;
  • धारा 22 की उपधारा (1) के खंड (c) के तहत गृह संनिर्माण के लिए ऋण या अग्रिम के रूप में देय राशि, खंड (e) के तहत शिक्षा सहायता खंड (f) के तहत देय चिकित्सा व्यय और वे व्यक्ति जो लाभार्थी पर निर्भर होगे और अन्य कल्याणकारी उपाय जो खंड (h) के तहत किए जा सकते हैं;
  • धारा 22 की उप-धारा (3) के खंड (c) के तहत स्थानीय प्राधिकारियों और नियोक्ताओं को देय अनुदान सहायता की सीमा;
  • धारा 25 के तहत वह प्रपत्र जिस पर और वह समय जिसके भीतर बोर्ड बजट तैयार करके सरकार को भेजेगा;
  • धारा 26 के तहत वह प्रपत्र जिस पर और वह समय जिसके भीतर बोर्ड वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को और केन्द्र सरकार को प्रस्तुत करेगा;
  • उप-धारा (1) के तहत लेखों के वार्षिक विवरण का प्रारूप, और धारा 27 की उप-धारा ;4द्ध के तहत वह तारीख जिसके पहले लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखों की लेखा परीक्षित प्रतिलिपि प्रस्तुत करेगाः
  • धारा 28 की उप-धारा (1) के तहत प्रदान की जाने वाली सामग्री और वह सीमा जिस तक और वे शर्तें जिनके अधीन उस उप-धारा के प्रावधान उस धारा की उप-धारा (2) के तहत संनिर्माण श्रमिकों पर लागू होगें;
  • ऐसे रजिस्टर व रिकॉर्ड जो नियोक्ता द्वारा अनुरक्षित किए जाएगें और वह प्रारूप जिसमें ऐसे रजिस्टर व रिकॉर्ड अनुरक्षित किए जाएंगे और धारा 30 की उप-धारा (1) के तहत उसमें शामिल किया जाने वाले विवरण;
  • धारा 30 की उप-धारा (2) के तहत प्रारूप और तरीका जिसमें नोटिस प्रदर्शित की जाएगी, और ब्यौरे जो उसमें शामिल किए जाएगें;
  • धारा 30 की उप-धारा (3) के तहत भवन श्रमिकों को मजदूरी बही या मजदूरी पर्ची का निर्गम और उनमें प्रविष्टि करने का तरीका और मजदूरी बही या मजदूरी पर्ची मे उन्हें प्रमाणीकृत किये जाने का तरीका;
  • धारा 33 के तहत प्रदान किए जाने वाले आवश्यक शौचालयों और मूत्रालयों के प्रकार;
  • धारा 36 के तहत प्रदान की जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं,
  • धारा 37 के खंड (a) के तहत प्रदान की जाने वाली कैंटीन सुविधाएं,
  • धारा 37 के खंड (b) के तहत प्रदान किए जाने वाले कल्याणकारी उपाय;
  • धारा 38 की उप-धारा (1) के तहत नियोक्ता और भवन संनिर्माण श्रमिकों के प्रतिनिधियों की संख्या और उस धारा की उप-धारा (2) के तहत सुरक्षा अधिकारियों की योग्यता और उनके द्वारा किये जाने वाले
  • कर्तव्य; दुर्घटना की सूचना का प्रारूप, इस संबंध में उपलब्ध कराए जाने वाले अन्य मामले और वह समय जिसके भीतर ऐसी सूचना धारा 39 की उप-धारा (1) के तहत दी जाएगी;
  • धारा 40 के तहत भवन संनिर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए बनाए जाने वाले नियम;
  • धारा 43 और उप-धारा (1) के तहत किसी निरीक्षक द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली शक्तियों और उसा धारा की उपधारा (2) के तहत नियोजित किए जा सकने वाले विशेषज्ञों या एजेंसियों के लिए आवश्यक योग्यता व अनुभव और वे शर्तें जिन पर ऐसे विशेषज्ञों या एजेंसियों को नियोजित किया जा सकेगा;
  • तारीख जिस पर या जिसके पहले किसी भवन संनिर्माण श्रमिक को मजदूरी दी जाएगी;
  • धारा 46 की उप-धारा (1) के खंड (i) के तहत वे विषय जिन्हें विहित करना आवश्यकता है;
  • कोई भी अन्य विषय जिसे विहित करने की आवश्यकता है, या हो सकती है। .

(3) इस अधिनियम के तहत केन्द्र सरकार द्वारा बनाये गये प्रत्येक नियम, बनाने के बाद जितनी जल्दी संभव हो सकेगा, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, सत्र में होने पर तीस दिन की अवधि के भीतर जिसमें एक सत्र या दो या उससे अधिक लगातार सत्र शामिल किए जा सकते हैं, रखा जाएगा और यदि, इस सत्र के तुरंत बाद आने वाले सत्र या पूर्वोक्त क्रमिक सत्रों की समाप्ति से पूर्व, दोनों सदन नियम में किसी संशोधन पर सहमत होते हैं या दोनों सदन इस बात से सहमत होते हैं कि नियम नहीं बनाया नहीं बनाया जाना चाहिए, के बाद, जैसा भी स्थिति हो, इस तरह के संशोधित रूप में प्रभावी होगा या निष्प्रभावी होगा; परंतु, ऐसा कोई भी संशोधन या निरसन पहले के नियम के तहत किये गये किसी निर्णय की वैधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।


(4) इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाने के बाद जितनी जल्दी संभव हो सकेगा, ऐसे विधानमंडल जिनमें दो सदन हैं प्रत्येक सदन में और जहां राज्य विधानमंडल में एक ही सदन है उस सदन के समक्ष, रखा जायेगा।


63. कुछ कानूनों का बचाव - इस अधिनियम का कोई भी प्रावधान किसी राज्य में कल्याणकारी योजनायें जो भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिकों के लिए इस अधिनियम के तहत या इसके द्वारा प्रदान की जाने वाली योजनाओं से अधिक फायदेमंद होगीं, के संगत किसी कानून के संचालन को प्रभावित नहीं करेगा।


64. निरसन और बचाव - (1) भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन), तीसरा अध्यादेश, 1996 (1996 का अध्यादेश 25) इसके द्वारा निरसित किया जाता है।


(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस अध्यादेश के तहत की गई कार्रवाई कुोई भी किया गया कार्य या की गई कार्यवाही, इस अधिनियम के संगत प्रावधानों के तहत की गई या किया गया समझा जाएगा।


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