उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड

श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

अध्याय I

प्रारंभिक

1. लघु शीर्षक, सीमा, प्रारंभ और लागू होना -

  • इस अधिनियम को भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 कहा जायेगा।
  • इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत है।
  • इसे मार्च, 1996 के प्रथम दिन से अस्तित्व में समझा जाएगा।
  • यह, उस प्रत्येक प्रतिष्ठान पर लागू होगा जिसने किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में वर्तमान में या पिछले बारह महीनों में किसी भी दिन दस या अधिक श्रमिकों को नियोजित किया हो;

स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, नियोक्ता द्वारा या ठेकेदार द्वारा नियोजित एक दिन में अलग रिले में कार्यरत संनिर्माण श्रमिकों को प्रतिष्ठान में कार्यरत संनिर्माण श्रमिकों की संख्या की गणना में शामिल किया जायेगा।


परिभाषाएँ -

(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-

(a) ‘समुचित सरकार’, से अभिप्रेत है, -

  • एक प्रतिष्ठान के संबंध में जो प्रत्यक्ष रूप से या एक ठेकेदार के माध्यम से संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करता है, जिसके संबंध में औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के तहत समुचित सरकार केंद्र सरकार है;
  • किसी भी ऐसे प्रतिष्ठान के संबंध में, जैसा कि केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम, जो या तो प्रत्यक्ष तौर पर या किसी ठेकेदार के माध्यम से संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करे, के लिए केन्द्र सरकार।

    स्पष्टीकरण- उपखंड ;पपद्ध के प्रयोजनों के लिए, केंद्र, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1), की धारा 617 में कंपनी के रूप में परिभाषित केन्द्र सरकार द्वारा स्वामित्व, नियंत्रित या प्रबंधित सरकारी कंपनी को ‘सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम’ समझा जायेगा;

  • किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में जो या तो प्रत्यक्ष तौर पर या किसी ठेकेदार के माध्यम से संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करता है, के संबंध में, उस राज्य की सरकार से अभिप्रेत है, जिसमें वह प्रतिष्ठान स्थित है;

(b) लाभार्थी से धारा 12 के तहत पंजीकृत एक संनिर्माण श्रमिक अभिप्रेत है;


(c) बोर्ड से, धारा 18 की उप-धारा (1) के अधीन गठित भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड, अभिप्रेत है;


(d) भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य से ‘संनिर्माण, परिवर्तन, मरम्मत, रखरखाव या विध्वंस या, भवनों, गलियों, सड़कों, रेलवे, ट्रैमवे, हवाई अड्डे, सिंचाई, जल निकासी, तटबंध और नौवहन संनिर्माण, बाढ़ (वर्षा जल निकास संनिर्माण सहित) नियंत्रण संनिर्माण, उत्पादन, पारेषण और विद्युत वितरण, पानी संनिर्माण (पानी के वितरण के लिए चैनलों सहित), तेल और गैस प्रतिष्ठान, बिजली लाइन, वायरलेस, रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, टेलीग्राफ और विदेशी संचार बांध, नहर, जलाशयों, जलमार्गों, सुरंगों, पुल, मार्ग सेतु, जलसेतु, पाइपलाइनों, टावरों, शीतलक टावरों, पारेषण टावरों और इस तरह के अन्य कार्य अभिप्रेत हैं जो समुचित सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट किये जा सकते हैं परंतु इसमें कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63), या खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) के प्रावधानों के अंतर्गत कोई इमारत या अन्य संनिर्माण कार्य शामिल नहीं है;


(e) भवन संनिर्माण श्रमिक से, किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण के संबंध में, रोजगार के संबंध में व्यक्त या निहित, चाहे किराये पर या पुरस्कार के लिए कोई भी, कुशल, अर्धकुशल या अकुशल, पर्यवेक्षी तकनीकी या लिपिकीय कार्य करने के लिए कार्यरत एक व्यक्ति अभिप्रेत है, लेकिन यह किसी भी ऐसे व्यक्ति को शामिल नहीं करता जो-


  • मुख्यतः एक प्रबंधकीय या प्रशासनिक क्षमता में नियोजित है; या
  • एक पर्यवेक्षी क्षमता में नियोजित है, जो या तो कार्यालय से जुड़े कर्तव्यों के स्वभाव के कारण या मुख्य रूप से उसमें निहित शक्तियों या प्रबंधकीय प्रकृति के कार्यों के कारण, प्रति माह या प्रति कार्य के अनुसार वह सोलह सौ रुपए से अधिक मजदूरी प्राप्त करता है;

(f) ‘मुख्य निरीक्षक’ से धारा 42 की उप-धारा (2) के तहत नियुक्त भवन और संनिर्माण निरीक्षण मुख्य निरीक्षक अभिप्रेत है।


(g) ‘ठेकेदार’ से किसी भी प्रतिष्ठान के कार्य के लिए वांछित परिणाम देने वाले व्यक्ति से अभिप्रेत है जो मात्र वस्तुओं या संनिर्माण समाग्रियों की आपूर्ति के अलावा संनिर्माण कर्मकारों की आपूर्ति भी करता है या जो किसी भी प्रतिष्ठान के किसी भी कार्य के लिए संनिर्माण श्रमिकों की आपूर्ति करता है, जिसमें उप ठेकेदार शामिल हैं;


(h) ‘महानिदेशक’ से धारा 42 की उप-धारा (1) के तहत नियुक्त निरीक्षण महानिदेशक अभिप्रेत है


(i)किसी प्रतिष्ठान के संबंध में, नियोक्ता से, उसका मालिक अभिप्रेत है, और इसमें निम्न शामिल हैं-


  • सरकार के किसी भी विभाग द्वारा किसी ठेकेदार के बिना सीधे किए जाने वाले कार्य के संबंध में प्राधिकार के तहत किया जाने वाला, कोई भवन या अन्य संनिर्माण कार्य तथा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, या जहां कोई अधिकारी निर्दिष्ट नहीं किया जाता है, विभाग का प्रमुख;
  • किसी भी स्थानीय प्राधिकरण या अन्य प्रतिष्ठान द्वारा किसी ठेकेदार के बिना सीधे किये जाने वाले, किसी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के संबंध में उस प्राधिकरण या प्रतिष्ठान का मुख्य कार्यकारी अधिकारी;
  • एक ठेकेदार के माध्यम से, ठेकेदार द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले भवन श्रमिकों के नियोजन के द्वारा किए गए किसी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के संबंध में एक ठेकेदार;

(j) प्रतिष्ठान, ऐसे प्रतिष्ठान जो, सरकार के स्वामित्व या उसके नियंत्रण के अधीन, या किसी निकाय, कंपनी या फर्म, किसी संघ या व्यक्तियों के किसी अन्य संगठन से अभप्रेत है जो भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करते हैंय और इसमें ठेकेदार से संबंधित एक प्रतिष्ठान भी शामिल है, लेकिन अपने निवास के लिए किसी भवन या संनिर्माण कार्य में ऐसे श्रमिकों को नियोजित करने वाले व्यक्ति शामिल नहीं हैं जिस संनिर्माण की कुल लागत दस लाख रुपए से अधिक नहीं है;


(k) ‘कोष’ से, धारा 24 की उप-धारा (1) के तहत गठित एक बोर्ड के भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष, अभिप्रेत है;


(l) अधिसूचना से, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना, अभिप्रेत है;


(m) विहित से, केन्द्र सरकार या, जैसी भी स्थिति हो, राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित, अभिप्रेत है;


(n) मजदूरी का अर्थ वही होगा जो मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 ;1936 का 4द्ध की धारा 2 के खंड (अप) में है।


(2) कोई भी कानून जो किसी भी क्षेत्र में लागू नहीं है का इस अधिनियम में कोई भी संदर्भ, उस क्षेत्र के संदर्भ में, जिसमें वह लागू है, यदि कोई है, वही होगा जैसा कि, संगत कानून के संदर्भ में लगाया गया है।

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