उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड

श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

अध्याय VII
निरीक्षण स्टाफ

42. महानिदेशक, मुख्य निरीक्षक और निरीक्षक की नियुक्ति - (1) केन्द्र सरकार, अधिसूचना द्वारा सरकार के एक राजपत्रित अधिकारी की निरीक्षण महानिदेशक के रूप नियुक्ति करेगी जो निरीक्षण के मानक तय करने के लिए उत्तरदायी होगा, और उन सभी प्रतिष्ठानों के संबंध में भारत भर में एक निरीक्षक की शक्तियों का प्रयोग करेगा जिनके लिए केन्द्र सरकार समुचित सरकार है।
(2) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, उस सरकार के एक राजपत्रित अधिकारी को भवन व संनिर्माण के निरीक्षण के लिए मुख्य निरीक्षक नियुक्त करेगी जो राज्य में इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी निष्पादन के लिए उत्तरदायी होगा और सम्पूर्ण राज्य में उन प्रतिष्ठानों के संबंध में इस अधिनियम के तहत एक निरीक्षक की शक्तियों का प्रयोग करेगा जिनके लिए राज्य सरकार समुचित सरकार है।
(3) समुचित सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिकारियों की ऐसी संख्या को निरीक्षकों के रूप में नियुक्त करेगी और उनकी ऐसी सीमा तय कर सकेगी जैसा वह उचित समझे।
(4) इस धारा के अधीन नियुक्त प्रत्येक निरीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, महानिदेशक या मुख्य निरीक्षक के नियंत्रण के अधीन होगा, और इस अधिनियम के तहत महानिदेशक या मुख्य निरीक्षक के सामान्य नियंत्रण व पर्यवेक्षण के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा अपने कृत्यों का पालन करेगा।
(5) महानिदेशक, मुख्य निरीक्षक और प्रत्येक निरीक्षक को भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक होना समझा जाएगा।


43. निरीक्षकों की शक्तियां- (1) इस संबंध में बनाए गए किसी भी नियम के अधीन, स्थानीय सीमाओं के भीतर जिसके लिए वह नियुक्त किया गया है, एक निरीक्षक निम्नलिखित कर सकेगा-

  • सरकार की सेवा में व्यक्ति होने के नाते ऐसे सहायकों ;यदि कोई हों तोद्ध के साथ, या किसी स्थानीय या अन्य सार्वजनिक प्राधिकारी के साथ जैसा वह उचित समझे, किसी भी परिसर या स्थान में जहां भवन या अन्य संनिर्माण कार्य किया जा रहा है, इस अधिनियम के तहत रखे जाने के लिए आवश्यक किसी भी रजिस्टर या रिकॉर्ड या सूचना के निरीक्षण के उद्देश्य से, सभी उचित घंटों में प्रवेश कर सकेगा, और निरीक्षण के लिए उनकी मांग कर सकेगा;
  • वह किसी भी व्यक्ति का निरीक्षण कर सकेगा जिसे वह किसी ऐसे परिसर या स्थान में पाता है और, उसके पास यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि वह, उसमें कार्यरत एक भवन श्रमिक है;
  • किसी भवन श्रमिक को भवन या अन्य संनिर्माण कार्य देने वाले किसी भी व्यक्ति से, व्यक्तियों के नाम और पते के संबंध में कोई भी जानकारी देने के लिए, जिनको, जिनके लिए या जिन्हें भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य किये जाने या लिये जाने या भवन संनिर्माण श्रमिक को भुगतान के संबंध मेंय कोई भी सूचना मांग सकेगा, जो उसकी शक्ति में शामिल है;
  • इस तरह के रजिस्टर, मजदूरी के रिकॉर्ड या नोटिस की प्रतियां उनके अंश काले सकेगा या उन्हें जब्त कर सकेगा जैसा कि वह इस अधिनियम के तहत किए गए अपराध के संबंध में प्रासंगिक समझे जिसके लिए उसके पास विश्वास करने का पर्याप्त कारण है कि वह नियोक्ता द्वारा किया गया है; और
  • ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।

(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, महानिदेशक या मुख्य निरीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, विशेषज्ञों या ऐसी योग्यता और अनुभव वाली एजेंसियों को ऐसी शर्तों नियोजित कर सकेंगे जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
(3) उप-धारा ;1द्ध के तहत किसी निरीक्षक द्वारा कोई भी आवश्यक जानकारी मांगे जाने या कोई भी दस्तावेज दिखाने के लिए किसी व्यक्ति को कानूनी तौर पर भारतीय दंड संहिता ;1860 का 45द्ध की धारा 175 और धारा 176 के अर्थों में ऐसा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होना समझा जाएगा।
(4) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के प्रावधान, वहां तक जहां तक कि, इस संहिता की धारा 94 के तहत जारी किए गए एक वारंट के अधिकार के अधीन किए गए किसी भी खोज या जब्ती के लिए लागू नहीं होती, उप-धारा ;1द्ध के अधीन की गई इस तरह की खोज या जब्ती पर लागू नहीं होगी।


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